ग़रीबी और इसके कारण
1. ग़रीबी और इसके कारण
1. ग़रीबी और इसके कारण
आज पूरा विश्व गरीबी के हिसाब से बेहद परेशान है घर घर में होने वाले कल्हों से लेकर जंग अन्य अपराधों के मूल में भी यही गरीबी छिपी हुई है।
इस गरीबी से केवल दौलत द्वारा ही मुक्ति पाई जा सकती है। माना की दौलत सब कुछ नहीं है। लेकिन यह भी सच है कि दौलत नहीं तो कुछ भी नहीं है। दौलत के बिना आप कुछ भी हासिल नहीं कर सकते। इसके बिना आपकी चाहते,आपके इच्छाएं, आपके के सपने, अधूरे रह जाते है।जीवन एक बोझ बन जाता है, वो बोझ,जिसे उठाना कठिन हो जाता है पर ना चाहते हुए भी उस भोज को उठाते -उठाते एक दिन जीवन लीला समाप्त हो जाती है। दोस्तों, गरीबी में जन्म लेना अभिशाफ़ नहीं है पर बल्कि गरीबी में मर जाना अभिशाफ है।
कई लोग यह मानते हैं कि उन्हें परमात्मा ने गरीब बनाया है। लेकिन सच तो यह है कि प्रभु कभी नहीं चाहते कि कोई मानव गरीबी के साथ जिए पर फिर भी अगर आप गरीब है तो यह सोचने की बात है कि आप को किसने बनाया बनाया? गरीबी की दलदल मैं आपको किसने फंसाया? स्वयं अपने, जी हां ,यही सच है। भले ही यह बात सुनने में अजीब और कठोर लगे पर सच यही है कि आप खुद ही अपनी गरीबी के लिए जिम्मेदार हैं। अपनी गरीबी को अपने जीवन में पनाह दी है।
परमात्मा ने किसी को गरीब नहीं बनाया,
आपने स्वयं ही उसे है गले लगाया।
उसने तो दो हाथ लए कर्म करने के लिए,
पर आलस्य को है अपने सिर पर बिठाया ।।
गरीबी का प्रभाव आपके मुंह तथा मानसिकता पर स्पष्ट झलक उठता है। इसका घिनौना रूप आपके जीवन के लिए किसी ग्रहण से कम नहीं है। आपको इससे पहचानना होगा ताकि आपका अपना जीवन सुखमय एवं सुंदर बन सके।
धंसी धंसी आंखे
पिचके हुए गल,
फटे हुए होंठ
जैसे हो पड़ा अकाल।
पीले मुरझाए चेहरे
उदासी और बुरा हाल,
कैसा बेसुरा हुआ जीवन
भूखे पेट न हो अलाप।
गरीबी इनकी बन गई है अभीशाफ़।।
जी हां। सही मायने में देखा जाए तो गरीबी किसी अभिशाप से कम नहीं है, जैसे जीवन खाने के लिए नहीं होता लेकिन खाना जीवन के लिए जरूरी होता है, उसी तरह जीवन पैसे के लिए नहीं होता लेकिन पैसे जीवन के लिए जरूरी होता है अगर आपके पास पैसा नहीं तो आप जिंदगी के अहम जरुरते भी पूरी नहीं कर को सकते। जीना जीना दूभर हो जाता है। पैसा साधना नहीं है पर पैसा साधन अवश्य है। पैसे से लगभग सारी आवश्यकताएं पूरी की जा सकती है। कैसी विडंबना है कि गरीब, अमीर होने के सपने तो देखता है लेकिन उसे साकार करने का प्रयास नहीं करता और कुछ इंसान ऐसे भी होते हैं जिन्हें दिल से मान लिया होता है कि वह गरीब ही रहेंगे। अमीर होना असंभव लगता है इसीलिए वह गरीबी के जाल से मुक्त होना नहीं चाहते।
कहा गया है - 'वीर भोग्यावसुन्धरा' इस पृथ्वी पर उपभोग वही कर सकता है जो वीर है अर्थात कर्मवीर तथा कर्मठ है। जिस प्रकार गरीबी के लिए आप खुद जिम्मेदार हैं उसी प्रकार से निपटने की निपटने की जिम्मेदारी भी आप ही की है। अगर आप गरीब से उबरना चाहते हैं तो यह कोशिश भी आपको खुद ही करनी होगी। देखा गया है कि आमतौर पर हर गरीब एक ऐसी सोच लो ना कर संतुष्ट हो जाता है कि भगवान ने पैदा किया है तो खाने को भी देगा; कोई किसी की किस्मत नहीं छीन सकता जो उसके भाग्य में है वह सिम मिलेगा आदि - आदि। ऐसी भावना मन में लिए वह बिना कोई प्रयास किए पड़ा रहता है। कुछ किए बिना लुभावना सपनों में खोया रहता है। वह कभी पूरे नहीं होते, क्योंकि खाना खाने के लिए भी हाथ हिलाने के सिद्ध पड़ती है। मैं पूछता हूं, क्या भगवान खाना हमारे मुंह में डालने भी आएगा? भगवान ने तो अपना काम कर दिया, हमें आज दिए मेहनत के लिए, दिमाग दिया अपनी सोच को ऊंचा रखने के लिए, सही गलत की पहचान के लिए। भगवान खजाना दे दिया, बस हमारी अपनी मर्जी है हम भाग्य पर छोड़कर गरीबी को चुनते हैं या अपनी मेहनत से,
सकारात्मक सोच से उस खजाने में से अमीरी चुनते हैं।
दोस्तों, एक गरीब तो वह वह होते हैं जो कर्म विहीन होते हैं और एक गरीब को भी होते हैं जो अधिक कर्म नहीं करना चाहते हैं।
दोस्तों मैं आपके लिए हर दिन ऐसे ही मोटिवेशनल लेख लेकर आऊंगा अगर आपको अच्छा लगे इस लेख को पढ़कर कुछ जानकारी के लिए कमेंट करें और अगर अच्छा लगे यह पोस्ट तो अपने फ्रेंड को जरुर शेयर करें।
धन्यवाद
कहा गया है - 'वीर भोग्यावसुन्धरा' इस पृथ्वी पर उपभोग वही कर सकता है जो वीर है अर्थात कर्मवीर तथा कर्मठ है। जिस प्रकार गरीबी के लिए आप खुद जिम्मेदार हैं उसी प्रकार से निपटने की निपटने की जिम्मेदारी भी आप ही की है। अगर आप गरीब से उबरना चाहते हैं तो यह कोशिश भी आपको खुद ही करनी होगी। देखा गया है कि आमतौर पर हर गरीब एक ऐसी सोच लो ना कर संतुष्ट हो जाता है कि भगवान ने पैदा किया है तो खाने को भी देगा; कोई किसी की किस्मत नहीं छीन सकता जो उसके भाग्य में है वह सिम मिलेगा आदि - आदि। ऐसी भावना मन में लिए वह बिना कोई प्रयास किए पड़ा रहता है। कुछ किए बिना लुभावना सपनों में खोया रहता है। वह कभी पूरे नहीं होते, क्योंकि खाना खाने के लिए भी हाथ हिलाने के सिद्ध पड़ती है। मैं पूछता हूं, क्या भगवान खाना हमारे मुंह में डालने भी आएगा? भगवान ने तो अपना काम कर दिया, हमें आज दिए मेहनत के लिए, दिमाग दिया अपनी सोच को ऊंचा रखने के लिए, सही गलत की पहचान के लिए। भगवान खजाना दे दिया, बस हमारी अपनी मर्जी है हम भाग्य पर छोड़कर गरीबी को चुनते हैं या अपनी मेहनत से,
सकारात्मक सोच से उस खजाने में से अमीरी चुनते हैं।
दोस्तों, एक गरीब तो वह वह होते हैं जो कर्म विहीन होते हैं और एक गरीब को भी होते हैं जो अधिक कर्म नहीं करना चाहते हैं।
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